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Showing posts from January, 2023

आओ मेरे यारों आज़ादी हासिल करें

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आओ मेरे यारों आज़ादी हासिल करें अन्याय असमानता और अत्याचार पर फिर से वार करें, फिर से वार करें बढ़ते सांप्रदायिक माहौल पर बिस्मिल अशफ़ाक दोस्ती का ब्रह्मास्त्र वार करें, बिस्मिल अशफ़ाक दोस्ती का ब्रह्मास्त्र वार करें आओ मेरे यारों आज़ादी हासिल करें जहां बात बात में व्यक्तिवाद है वहां भगत का समाजवाद भरें जहां स्वकल्याण स्वहित का नारा है वहां जनहित की हम बात करें सदियों से वंचित अधिकारों से जो वह स्त्री जाति की बात करें आओ मेरे यारों आज़ादी हासिल करें खौफजदा इन गलियों में आज़ादी की हवा बहे सूरज सर पर हो  या हो बात अमावस रात की मां बहनें इस भारत की बेखौफ चलें, बेखौफ चलें कुछ ऐसा करें,कुछ ऐसा करें स्त्री की जब बात हो आजाद की सी मन में मर्यादा बसे  आजाद की सी मन में मर्यादा बसे आओ मेरे यारों आज़ादी हासिल करें कुछ खुदीराम को याद करें कुछ सुभाष बोस को प्रणाम करें जैसा चाहा था भारत उनने  उस भारत का हिस्सेदार बने मजदूरों किसानों का जीवन शोषण से जब मुक्त बने जहां की राजनीति में धर्म जाति हो दरकिनार शिक्षा स्वास्थ्य सुरक्षा आदि  जब राजनीति के मुद्दे हों  कुछ ऐ...

जीवन

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मृत्योपरांत जीवित रहने के लिए जीवनपर्यंत जीना होता है, रक्त का प्रवाह जीवंतता का प्रमाण नहीं, सत्य के साथ, असत्य के खिलाफ लड़ना होता है, सही की स्थापना, गलत का उन्मूलन करना होता है।

जीवन

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जीवन क्या है ? मेरे मस्तिष्क और शायद बहुतों के मस्तिष्क में पैदा ये सवाल वाकई विचारणीय है। जो मैं देख रहा हूं सामान्य रूप में व्यक्ति का जन्म होना एजुकेशन यानी शिक्षा हासिल करना वह शिक्षा जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना या जो आर्थिक स्थिति को बेहतर करे सरल शब्दों में एक सरकारी या गैर सरकारी पद हासिल करना और फिर तमाम अव्यवस्थाओं का शिकार और हिस्सेदार रहते हुए एक नैतिक पतन की ओर अग्रसर समाज में उपभोक्तावादी चरित्र को अख्तियार करते हुए जीवन के अंतिम समय का इंतजार करना और इस प्रक्रिया के लिए अपनी संतानों को तैयार करके जाना । क्या यही जिंदगी है? एक इंसान के तौर पर क्या इस तरह का जीवन ही सबसे सही और अच्छा है। जिस समाज में हम सांस लेते हैं हमारे होते हुए उसी समाज में तमाम प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूपों में  एक मनुष्य द्वार दूसरे मनुष्य पर किया जाने वाला शोषण कायम है, तमाम सामाजिक असमानता , अवैज्ञानिकता , अन्याय , अत्याचार कायम है , हमारे समाज का आधा हिस्सा यानी स्त्री सामाजिक राजनैतिक सहभागिता से आज भी दूर है, तमाम सामाजिक गैरबराबरी,समाज का बहुत बड़ा हिस्सा संसाधन हीन...

मेरे दोस्तों

मेरे दोस्तों, सामाजिक बदलाव के लिए  सामाजिक संघर्ष के भागीदार बनें व्यक्ति व्यक्ति विकास से समाज का विकास संभव नहीं, समाज व्यक्तियों के समूह से इतर एक अलग चीज है  समाज के विकास और उन्नति से ही व्यक्ति का विकास और उन्नति होना है

आजाद कब होंगे ?

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  आज..... पूर्ण हर्षोल्लास के साथ आजादी मनाते हैं कुर्बान हुए अमर शहीदों को फिर सलाम करते हैं तुम्हारे बलिदान में कोई कमी न थी संघर्ष तुम्हारा पवित्र आज़ादी को था बहुत मिली है आजादी यह हम अहसास करते हैं सबसे बड़ी आजादी है अब हम बेखौफ लिखते बोलते हैं जो गलत लगे उसका हम अब हक से विरोध करते हैं पढ़ सुन कर ब्रिटिश हुकूमत का जुल्म और अत्याचार आज जो हैं हम देख कर इस आजादी के परवानों को कोटि कोटि प्रणाम यह आज़ादी का अवसर तीक्ष्ण शोक और सुख का संगम है चेहरे पे खुशी आंखों में नमी, हृदय में बड़ा टकराव है आजादी के अमर शहीदों को मेरा अमर सलाम है शिक्षा अपनी, संस्कृति अपनी अपना ये अब समाज है सिस्टम भी अपना और उस पर अपनों का ही राज है पर.... पर इस आजाद मुल्क में अब जुल्म के कई और रूप आएं हैं अपनों पर अपनों ने अब जुल्म ढाए है अनैतिकता, दुराचार, भ्रष्टाचार, व्यभिचार ने इस आज़ादी की छांव में अपने पंख पसारे हैं परंपरा, धर्म, जाति, संप्रदाय और सबसे अहम मुल्क पूंजी का गुलाम हुआ जा रहा है। आज फिर से जरूरत है आजादी की इस दी हुई आजादी को पूर्ण रूप देने को हम आजाद होंगे जब आजाद होगी सोच हमारी...