आजाद कब होंगे ?
आज.....
पूर्ण हर्षोल्लास के साथ आजादी मनाते हैं
कुर्बान हुए अमर शहीदों को फिर सलाम करते हैं
तुम्हारे बलिदान में कोई कमी न थी
संघर्ष तुम्हारा पवित्र आज़ादी को था
बहुत मिली है आजादी
यह हम अहसास करते हैं
सबसे बड़ी आजादी है
अब हम बेखौफ लिखते बोलते हैं
जो गलत लगे उसका हम अब हक से विरोध करते हैं
पढ़ सुन कर ब्रिटिश हुकूमत का जुल्म और अत्याचार
आज जो हैं हम देख कर
इस आजादी के परवानों को कोटि कोटि प्रणाम
यह आज़ादी का अवसर तीक्ष्ण शोक और सुख का संगम है
चेहरे पे खुशी आंखों में नमी, हृदय में बड़ा टकराव है
आजादी के अमर शहीदों को मेरा अमर सलाम है
शिक्षा अपनी, संस्कृति अपनी अपना ये अब समाज है
सिस्टम भी अपना और उस पर अपनों का ही राज है
पर....
पर इस आजाद मुल्क में अब जुल्म के कई और रूप आएं हैं
अपनों पर अपनों ने अब जुल्म ढाए है
अनैतिकता, दुराचार, भ्रष्टाचार, व्यभिचार ने
इस आज़ादी की छांव में अपने पंख पसारे हैं
परंपरा, धर्म, जाति, संप्रदाय और सबसे अहम
मुल्क पूंजी का गुलाम हुआ जा रहा है।
आज फिर से जरूरत है आजादी की
इस दी हुई आजादी को पूर्ण रूप देने को
हम आजाद होंगे जब आजाद होगी सोच हमारी
जब हम सोच पाएंगे अपने धर्म, संप्रदाय और
विचारधारा के परे, वो जो इंसानियत के पक्ष में है।
हम आजाद होंगे जब इस आजाद मुल्क की बेटियां
मुल्क में आजादी से घूम सकें, जी सकें ।
हम आजाद होंगे जब मुल्क के युवाओं और पुरुषों में
स्त्रियों के प्रति पैदा वहशीपन खत्म होगा,
हम आजाद होंगे तब जब इस मुल्क के युवाओं में वो चरित्र पैदा होगा
जो इस आजादी के परवानों ,अमर शहीदों में था।
हम आजाद होंगे जब इस मुल्क में कोई विद्यार्थी
रोजगार न मिलने से मृत्यु को गले न लगा लगे।
हम आजाद होंगे जब अपने खेतों में इतनी कमाई न सकने से की वह अपना घर चला सके
कोई किसान अपनी सांसें न थाम ले।
हम कह सकेंगे हम आजाद हैं
जब इस आजाद मुल्क में कोई भूख से न मरे,
हम आजाद होंगे जब हम टैक्सी से उतरेंगे और हमारे सामने 5 से 10 साल के मासूम बच्चे
उनकी माएं हाथ फैलाएं नहीं खड़ी होंगी
हम आजाद होंगे जब इस आजाद मुल्क के एक बड़ी आबादी को नींदें फुटपाथ पर नहीं गुजरेंगी।
हम आजाद होंगे जब किसी एक शख्स को सौ लोगों की भीड़
मिलकर पीट पीट कर उसकी जान नहीं लेगी।
महज धर्म के नाम पर ।
हम आजाद जरुर हैं
पर आजाद मुल्क के आजाद दोस्तों
यकीन मानो आजादी अभी बहुत दूर है।
हम आजाद होंगे जब आजाद होगी हमारी सोच इंसानियत के पक्ष में
भारतीय समाज को आजादी के इस स्तर तक पहुंचाने वाले महान अमर शहीद क्रांतिकारियों को फिर से अपने चरित्र में पैदा करने की जरूरत को महसूस करते हुए उन्हें सलाम।
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