तुम स्वयं को कितना भी स्वच्छ बना लो, कितना भी अपना परिवार बचा लो।
समाज रूपी सागर में रहकर उसमें व्याप्त गंदगी से बचना असंभव है,
तुम्हारा भ्रम मात्र कि बचते बचाते तुम एक बेहतर जीवन जी पाओगे,
संघर्ष अपरिहार्य है, जिससे मुंह मोड़ना महज अल्पज्ञता की सिवा कुछ भी नहीं।
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